क्या अमरों का लोक मिलेगा तेरी करुणा का उपहार
क्या अमरों का लोक मिलेगा तेरी करुणा का उपहार? रहने दो हे देव! अरे यह मेरा मिटने का अधिकार
Friday, June 8, 2012
धुँआ -धुँआ .........
नयन के नीर
मेरी तकदीर
तेरी तस्वीर
अब सब कुछ है
धुँआ -धुँआ .........
त्रिवेणी ......................
जब से दिल तन्हा हुआ .........
तब से दिल अपना हुआ .........
वरना बेचारा किस किस की खिदमत में मारा- मारा फिरता रहा था .
तुम क्या समझोगे
नदी की प्यास
पेड़ों की भूख
हवा की घुटन
जमीन(मातृत्व) की पीड़ा
तुम क्या समझोगे .....
Sunday, May 20, 2012
थोड़ी तारीफ़ भी रखना सीखो अपने दामन में
थोड़े गम भी देना सीखो अपने दामन से .......
जिन्दगी का व्यापार करना कब सीखोगी तुम
Wednesday, May 9, 2012
निश्चिन्त और आश्वस्त
थी मै ..........
अब तुम आ गए हो
तुम्ही सम्हालो
मेरी सारी
वे-वजह की चिंताएं ,
परेशानियाँ मेरे जीवन की सारी ,
नाकामियाँ...........
तुमने कहा कभी नहीं
पर समझते समझते उम्र चुक गयी
तुम नहीं चाहते थे एक परजीवी बेल
जो बरगद की छाँव में अपनी ख़ुशी ढूंढती रहे
नीलम
मिश्रा
Tuesday, May 8, 2012
बस थोड़ी देर और .........
बस थोड़ी देर और .........
यही कहते रहे तुम ........
और मै समय के टुकड़े
टॉफी के रैपर
की तरह
तुम्हारी जेब में रखती रही .
नीलम मिश्रा
दिन जैसे जैसे उम्र की संध्या की ओर बढ़ते है
न जाने क्यूँ हम उन्हें और याद करने लगते हैं
अब वक़्त की किल्ल्लत और खुदा की मिन्नत का लेखा जोखाकौन करे
neelam mishra
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