वो राहगीर था मेरी तरह
उसे मंजिल उसकी मिले
मुझे मंजिल अपनी
चाहे हो राहें जुदा- जुदा
या खुदा .........
उसे मंजिल उसकी मिले
मुझे मंजिल अपनी
चाहे हो राहें जुदा- जुदा
या खुदा .........
क्या अमरों का लोक मिलेगा तेरी करुणा का उपहार? रहने दो हे देव! अरे यह मेरा मिटने का अधिकार