Showing posts with label कविता सा कुछ. Show all posts
Showing posts with label कविता सा कुछ. Show all posts

Friday, November 25, 2011

चाँद तो अब भी.........

चाँद तो अब भी.........

क्याहुआ जो नहीं पूछा,
उन्होंने गर हाल कभी
क्या हुआ गर दिल से,
दिल दूर ही सही
क्या हुआ गर,
मेरी गली अब
तेरी गली नहीं
चाँद तो अब भी
पूरे शहर पे काबिज़ है ...............