(आत्म साक्षात्कार )
गलतियों पर गलतियाँ ,
उस पर से तुर्रा यह की ,
इस वजह से नहीं या ,
फिर हमारा इरादा तो,
ये नहीं था ,कुछ तो सोचो ,
अपने आप को खुद की नजरों
में कितना और गिराओगे अभी
(आत्म साक्षात्कार )
क्या अमरों का लोक मिलेगा तेरी करुणा का उपहार? रहने दो हे देव! अरे यह मेरा मिटने का अधिकार
Wednesday, May 18, 2011
Tuesday, May 10, 2011
तुम दिल हो ,तुम धड़कन हो
तुम दिल हो ,तुम धड़कन हो ,
तुम मंजिल, तुम भगवन हो ,
तुम बाती,तुम ज्योति हो ,
तुम दीपक, तुम उजास हो
तुम सरुवर, तुम पानी हो ,
तुम सागर तुम सीपी हो
तुम नैया तुम खेवन हो ,
तुम मैया तुम जीवन हो
तुम तुम हो प्रभु तुम तुम हो ,
तुम हो तो प्रभु सब जग है ,
तुम मंजिल, तुम भगवन हो ,
तुम बाती,तुम ज्योति हो ,
तुम दीपक, तुम उजास हो
तुम सरुवर, तुम पानी हो ,
तुम सागर तुम सीपी हो
तुम नैया तुम खेवन हो ,
तुम मैया तुम जीवन हो
तुम तुम हो प्रभु तुम तुम हो ,
तुम हो तो प्रभु सब जग है ,
Thursday, April 21, 2011
इसकी घडी कभी खराब नहीं होती ??
वो रोज बिना नागा किये आता ,
रोज दुपहरी में छत पर आकर ,
दाना खाता,हमे निहारता ,
मानो पूछता हो कैसी हो ,
सब खैरियत तो है ,
हस देती कितनी फिक्र है तुम्हे .......
एक बात आज तक समझ में नहीं आई ,
इसकी घडी कभी खराब नहीं होती ?????
इसे कभी घड़ीसाज के पास जाते
तो आज तक देखा नहीं
Wednesday, April 13, 2011
उसकी सूरत और सीरत अभी तक एक थी
ये किस दिल की दुआ थी ,
ये किसकी नेमत थी ,
उसकी सूरत और सीरत अभी तक एक थी
ये किसकी नेमत थी ,
उसकी सूरत और सीरत अभी तक एक थी
Monday, April 4, 2011
मिलने वाले बिछड़ गए
मिलने वाले बिछड़ गए ,
जाने वो न जाने हम
रास्ते अपने ,मंजिल अपनी ,
अब क्या सोचो कहाँ गए,
मिले कभी ,तो गिला न करना
बिछड़े तो किधर गए ,
जाने वो न जाने हम
रास्ते अपने ,मंजिल अपनी ,
अब क्या सोचो कहाँ गए,
मिले कभी ,तो गिला न करना
कहना उनसे सदा यही,
गुजर रहे थे ,
अरे बस यूँ ही ,
बस इधर ही
Tuesday, December 7, 2010
पर अब वो मुठ्ठी कहाँ होती है ????
पर अब वो मुठ्ठी कहाँ होती है ??
एक मुठ्ठी नीला आसमान ,
एक मुठ्ठी पीला खलिहान
एक मुठ्ठी चीडियो को दाना
एक मुठ्ठी बागो के फूल
एक मुठ्ठी मिट्टी की धूळ ,
एक मुठ्ठी हंसती सी धूप
...............................
एक मुठ्ठी खाली समय ,
एक मुठ्ठी आवारा नजर ,
एक मुठ्ठी उसका अपनापन,
एक मुठ्ठी मेरा दीवानापन ,
पर अब वो मुठ्ठी कहाँ होती है ????
Wednesday, December 1, 2010
सिर्फ एक आस थी वो ..............
सांवली सी सूरत , मोहिनी सी मूरत थी वो
किसकी बांसुरी , किसी धुन थी वो ,
मीरा की न राधा की न वो ,
कृष्णा की तान न मुरली की ध्यान थी वो ,
किसकी नज़र से देखूं तुझको ,
सुबह की शाम की
सिर्फ एक आस थी वो ..............
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